रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका, 100 साल में नेहरू-गांधी परिवार से राजनीति में 12वीं एंट्री

राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की प्रभारी बनाकर मां सोनिया गांधी की सक्रिय चुनावी राजनीति से विदाई का रास्ता साफ कर दिया है। तय योजना के मुताबिक, इस बार सोनिया की जगह प्रियंका रायबरेली से लाेकसभा चुनाव लड़ेंगी। सोनिया की भूमिका कांग्रेस में मार्गदर्शक की होगी। जरूरत पड़ी तो यूपीए चेयरपर्सन बनी रह सकती हैं। उधर, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, विजयलक्ष्मी, इंदिरा गांधी, फिरोज गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, मेनका गांधी, राहुल गांधी, वरुण गांधी के बाद गांधी-नेहरू परिवार से प्रियंका की राजनीति में यह 12वीं एंट्री है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सोनिया ने काफी समय पहले स्वास्थ्य संबंधी वजहों से चुनाव नहीं लड़ने की बात कही थी। रायबरेली और अमेठी पूर्वी यूपी में हैं। ऐसे में प्रियंका को रायबरेली से उतारकर कांग्रेस पूरे यूपी में असर पैदा करना चाहती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, राहुल मोदी और योगी को उनके घर में ही घेरना चाहते हैं। उन्होंने पिछले दो चुनाव के आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसी 26 सीटों पर फोकस किया है, जहां पार्टी टक्कर देने की स्थिति में है। कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने कहा कि 1989 के बाद प्रदेश की सत्ता से बाहर होने के बावजूद पार्टी को न्यूनतम 8.5% और अधिकतम 14% वोट मिलते रहे हैं। ऐसे में प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस को यूपी से बड़ी उम्मीद है।

तैयारी यूपी में, नजर पूरे देश पर

यूपी की 80 सीटों में से 33 प्रियंका देखेंगी। मोदी की सीट वाराणसी, योगी का गढ़ गोरखपुर, मुलायम की सीट आजमगढ़, ये सब प्रियंका के कार्यक्षेत्र में आएंगी। मोदी-योगी को यहां घेरने से देशभर में असर दिख सकता है।
कांग्रेस की 2009 में 21 सीटें थीं। 15 पूर्वी यूपी में थीं। वोटशेयर 19% था, जो 2014 में 9% बच गया और सीटें सिर्फ दो। इसलिए प्रियंका वहां काम करेंगी। ज्योतिरादित्य सिंधिया पश्चिमी यूपी की कमान संभालेंगे।

रणनीति- सपा-बसपा से दोस्ती की

मायावती और अखिलेश कांग्रेस के बिना गठबंधन कर चुके हैं, लेकिन कांग्रेस उनके साथ जाने को तैयार है। राहुल ने बुधवार को कहा- "मैं मायावती जी और अखिलेश का आदर करता हूं। हम साथ लड़ सकते हैं।"

सोनिया गांधी भी तब आई थीं, जब पार्टी हाशिए पर थी

इंदिरा गांधी 1930 में इंडियन लीग की सदस्य बनीं। 1951 में पिता और पति के लिए प्रचार किया। 42 साल की उम्र में अध्यक्ष बनीं। 1966 में जब प्रधानमंत्री बनीं तो कांग्रेस की 283 सीटें थीं। वे कुल चार बार प्रधानमंत्री बनीं।
नरसिम्हा सरकार की हार के बाद सोनिया ने 1997 में पार्टी सदस्यता ली। तब पार्टी की 140 सीटें थीं। कांग्रेस 1996 से 2004 तक सत्ता से बाहर रही। फिर 1998 में अध्यक्ष बनीं।1999 में चुनाव जीतीं। 2004, 2009 में कांग्रेस को सत्ता दिलवाई।

प्रियंका उसी दफ्तर में बैठेंगी, जहां इंदिरा बैठा करती थीं

प्रियंका को ऐसे समय में पार्टी में लाया गया, जब कांगेस की सिर्फ 45 सीटें हैं। कांग्रेस यूपी में प्रियंका के जरिए इंदिरा गांधी के प्रशंसकों को पार्टी के साथ जोड़ना चाहती है। इसलिए नेहरू भवन के उसी कमरे को प्रियंका का ऑफिस बनाने का काम बुधवार शाम से ही शुरू कर दिया गया, जहां इंदिरा गांधी बैठा करती थीं।

गांधी-नेहरू परिवार से राजनीति में डेब्यू

मोतीलाल नेहरू: मोतीलाल नेहरू 1919 में अमृतसर में पहली बार अध्यक्ष बने थे। तब वह 58 साल के थे। दूसरी बार 1928 में कलकत्ता में अध्यक्ष चुने गए।
जवाहरलाल नेहरू:  प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 1936 में 47 साल की उम्र में कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। 5 बार अध्यक्ष रहे। करीब 17 साल तक प्रधानमंत्री रहे।
विजयलक्ष्मी: नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित 1946 यूनाइटेड प्रोविंस से विधानसभा पहुंचींं। दो बार फूलपुर से सांसद और महाराष्ट्र की राज्यपाल भी रहीं।
इंदिरा गांधी: 1959 में 42 साल की उम्र में अध्यक्ष चुनी गईं। 3 बार कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। 1966 से 1977 और 1980 से 1984 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
फिरोज गांधी:  फिरोज गांधी ने 1942 में इंदिरा गांधी से शादी की। 1952 में यूपी की प्रतापगढ़ सीट और 1957 में रायबरेली सीट से सांसद चुने गए।
संजय गांधी:  इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी 1980 में अमेठी से सांसद चुने गए थे। हालांकि 5 महीने बाद ही एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।
राजीव गांधी:  गांधी-नेहरू परिवार में कांग्रेस अध्यक्ष बनने वालों में राजीव सबसे कम उम्र के हैं। 1985 वह अध्यक्ष बने। राजीव 1984 में देश के छठें प्रधानमंत्री बने।
मेनका गांधी:  केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी 1988 में जनता दल की महासचिव बनाई गईं। 1989 में पहली बार पीलीभीत से सांसद बनीं। वह 7 बार से सांसद हैं।
सोनिया गांधी: सोनिया गांधी 52 की उम्र में 1998 में कलकत्ता में कांग्रेस अध्यक्ष चुनी गईं। वह 2017 तक यानी 19 साल पार्टी अध्यक्ष रहीं। 1999 से सांसद हैं।
राहुल गांधी: राहुल 2004 में पहली बार अमेठी से सांसद चुने गए। 2007 में 37 की उम्र में महासचिव और 2013 में उपाध्यक्ष बने। 2017 से वह कांग्रेस अध्यक्ष हैं।
वरुण गांधी: संजय और मेनका के बेटे वरुण 2004 में भाजपा में आए। 2009 में पीलीभीत से संसद पहुंचे। 2013 में 33 की उम्र में भाजपा के महासचिव बने।
प्रियंका गांधी वाड्रा: प्रियंका 47 साल की उम्र में कांग्रेस की महासचिव बनाई गईं। इससे पहले तक वह अमेठी और रायबरेली में ही पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करतीं थीं।

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