फिर गिरे पेट्रोल-डीजल के दाम, 2018 में सबसे सस्ता पेट्रोल आज

पेट्रोलियम कंपनियों ने रविवार को पेट्रोल के दाम में 22 पैसे की कटौती की. इससे पेट्रोल 2018 में सबसे निचले स्तर पर आ गया है जबकि डीजल की कीमतें 23 पैसे कम होकर नौ महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं.

पेट्रोलियम कंपनियों की सूचना के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल 69.26 रुपए से घटकर 69.04 रुपए प्रति लीटर जबकि डीजल 63.32 रुपए से 63.09 रुपए प्रति लीटर पर आ गया है. सिर्फ एक दिन को छोड़कर पेट्रोल की कीमतों में 18 अक्टूबर से लगातार गिरावट जारी है और अब यह 2018 के सबसे निचले स्तर पर आ गया है. डीजल मार्च के बाद अपने सबसे कम रेट पर है. पेट्रोल 18 अक्टूबर से लेकर अब तक 13.79 रुपए सस्ता हुआ जबकि इन ढाई महीनों में डीजल 12.06 रुपए गिरा है.

चार अक्टूबर को पेट्रोल दिल्ली में 84 रुपए प्रति लीटर और मुंबई में 91.34 रुपए प्रति लीटर के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया था. इस दौरान, दिल्ली में डीजल 75.45 रुपए लीटर और मुंबई में 80.10 रुपए लीटर के ऊंचे स्तर पर था. ईंधन के दाम 16 अगस्त से बढ़ना शुरू हुए थे. 16 अगस्त से चार अक्टूबर के बीच पेट्रोल 6.86 रुपए जबकि डीजल 6.73 रुपए बढ़ा. सरकार ने चार अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 1.50-1.50 रुपए की कटौती की थी और पेट्रोलियम का खुदरा काम करने वाली सरकारी कंपनियों को एक रुपए प्रति लीटर का बोझ ढोने के लिए कहा था.

इसके बाद पांच अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल-डीजल में कीमतों में गिरावट आई. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहने से 17 अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल 82.83 रुपए और डीजल 75.69 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया था लेकिन इसके बाद कच्चे तेल के दाम गिरने और रुपए में सुधार से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में गिरावट रही. ढाई महीने के दौरान, पेट्रोल सिर्फ एक दिन (18 दिसंबर को) 10 पैसे बढ़ा जबकि डीजल 17 और 18 दिसंबर को क्रमश: नौ और सात पैसे बढ़ा. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्य में कुछ और गिरावट हो सकती है.

बता दें कि हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट में बताया है कि बैंकों ने वित्त वर्ष 2018 में फंसे कर्ज की रिकवरी में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. मार्च 2018 में खत्म वित्त वर्ष में बैंकों ने 40,400 करोड़ रुपये का बैड लोन रिकवर किया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017 में 38,500 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई थी. इसका श्रेय इन्सॉलवेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (IBC) और सिक्यॉरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशल ऐसेट्स ऐंड इंफोर्समेंट ऑफ सिक्यॉरिटी इंटरेस्ट्स (SARFAESI) ऐक्ट में संशोधन को दिया गया है.

कहते हैं कि बिग बॉस का विनर बनने का रास्ता किचन से होकर जाता है. पिछले सीजन्स की लेडी विनर ने ये धारणा सही साबित की है. दीपिका की यही किचन स्ट्रैटिजी श्रीसंत पर भारी पड़ी. महिला वर्ग में दीपिका कक्कड़ की फैंन फॉलोइंग में इजाफा हुआ. दीपिका के घरेलू महिला कार्ड ने उन्हें जिताने में मदद की. श्रीसंत, कई टास्क में शामिल नहीं हुए. तमाम मौकों पर उन्हें देखकर लगता था कि वो लोगों से कट रहे हैं. दूसरी अहम बात यह रही कि आम कंटेस्टेंट को लेकर श्रीसंत का सेलिब्रिटी रवैया भी उनके खिलाफ गया.  

श्रीसंत की एक आदत ऑडियंस को सबसे खराब लगी. शायद इसी बैड बॉय इमेज ने उन्हें ट्रॉफी से दूर रखा. श्रीसंत ने शो में कई बाद कॉमनर कंटेस्टेंट को नीचा दिखाया. वे हर बात पर सेलेब्रिटी स्टेट्स दिखाते थे. उन्हें घमंडी, बिगड़ैल और बदतमीज भी कहा गया. क्रिकेटर ने दीपक को एक बार खुद को नौकर तक कह दिया था. कई बार कंटेस्टेंट की सोशल स्टेटस को लेकर ऐसा कमेंट किया गया, जिसे वोट करने वाला हिंदी पट्टी के आम दर्शक ने बिल्कुल पसंद नहीं किया होगा.

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